दिल के ज़ख्म

वो पूंछ रहे हैं लोगों से क्यों महफिल मे तन्हाई है
आज मोहब्बत मे हमने अरमानो की चिता जलाई है,
दुनियावाले क्या बयां करेंगे अफ़साने रुसवाई के
दिल के ज़ख्म बताते हैं क्या खूब कयामत आई है ।

ख़ाक हो चुके अरमानो की आज नुमाइश मे आए हैं
उनसे कह दो अब अरमाँ नही बाकी कोई इस दिल मे,
जिन ख्वाबों पे हक था उनके दामन की परछाई का
अरमानो के साथ जला आए हैं उनकी महफिल मे ।
जिंदगी आज फिर मौत से लड़ आई है
दिल के ज़ख्म बताते हैं क्या खूब कयामत आई है ।

कुछ साथ गुजारे लम्हों की यादें अब साथ निभाएंगी
शहनाइयों के मौसम मे आँसू आँखों मे लाएंगी
हर बार बहल जाएगा दिल एक प्यार भरे अफ़साने से
कोई मीत के प्रीत की दीवानी जब गीत वफ़ा के गायेंगी
यार दोस्त सब बेगाने बस अपनी इक तन्हाई है
दिल के ज़ख्म बताते हैं क्या खूब कयामत आई है ।

……..देवेंद्र प्रताप वर्मा”विनीत”

5 Comments

  1. mukta mukta 11/04/2018
  2. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 12/04/2018
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 12/04/2018
  4. C.M. Sharma C.M. Sharma 13/04/2018
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 15/04/2018

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