कविता की जंगल

लिखी गई है
बहुत सी कवितायेँ
पहले
बहुत सारी जगहों पर
अनेक विषयों पर
देश और विदेशों में भी

लिखी जाएगी
बहुत सी कवितायेँ
वहां
जहाँ लिखी नहीं गई है
जानी,अनजानी
देशों पर

इस वर्त्तमान युग में
कम नहीं हुआ है
इसकी मान

मेरी भी अभिलाषा है
इस कविता की
घने जंगल में
मेरी भी एक
हरियाली पेड़ हो .

5 Comments

  1. davendra87 davendra87 11/04/2018
  2. davendra87 davendra87 11/04/2018
  3. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 12/04/2018
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 12/04/2018
  5. C.M. Sharma C.M. Sharma 13/04/2018

Leave a Reply