ज़रा खुलने तो दो — डी के निवातिया

ज़रा खुलने तो दो

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शेर सारे पढ़े जायेंगे तुम्हारे मतलब के ज़रा खुलने तो दो
बाते तमाम होंगी वफ़ा संग बेवफाई की ज़रा घुलने तो दो !!

हर रंग के गुलों से सजायेंगे, ये महफ़िल तुम्हारी शान में
मज़ा ना आये गुफ्तगू में कहना, ज़रा मिलने जुलने तो दो !!

दिल सभी के धड़केंगे जब कसीदे परत-दर-परत पढ़े जाएंगे
दो पल की मुहलत दो, मुशायरे के माहौल में ढलने तो दो !!

बैठे है कई गुनेहगार इश्क के, पहली से आखिरी सफ़ तक
कराएंगे हर एक से ख़ुत्बा, ज़रा लबो को हिलने तो दो !!

जह करते हो शिकायत, हकीकत से तुम वाकिफ नहीं
करेंगे हम याद फिर से तुम्हे,लब ज़रा हिलने डुलने तो दो !!

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डी के निवातिया

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ख़ुत्बा – परिचय

सफ – पंक्ति/कतार

8 Comments

  1. davendra87 davendra87 10/04/2018
  2. davendra87 davendra87 10/04/2018
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 10/04/2018
  4. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 10/04/2018
  5. bhupendradave 10/04/2018
  6. ANU MAHESHWARI Anu Maheshwari 10/04/2018
  7. C.M. Sharma C.M. Sharma 13/04/2018

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