हम जो सामने पड़े – शिशिर मधुकर

नज़रें घुमा ली आपने हम जो सामने पड़े
हमको भी क़दम फिर तो वहीं थामने पड़े
भूले नहीं है खुद को तूने हम पे उड़ेला था
दिल की सदा कही यूँ खाली जाम ने पड़े

रुसवा हुईं जब भी मैंने तेरे साथ को चुना
आज़ादी के अरमान मेरे होते थे अनसुना
इतनी सही है पीर मैंने मुस्कान के लिए
मुद्दत से फिर तो कैसा भी ख़्वाब ना बुना

शिशिर मधुकर

8 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 10/04/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 13/04/2018
  2. ANU MAHESHWARI Anu Maheshwari 10/04/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 13/04/2018
  3. C.M. Sharma C.M. Sharma 13/04/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 13/04/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 13/04/2018

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