अधूरे से – शिशिर मधुकर

अधूरे से दिखे मुझको तुम्हें कल शाम को देखा
बिना सिय के तड़पते जैसे अकेले राम को देखा

सभी गोपी कृष्ण को घेर कर उल्लास करती थी
मगर राधा के बिन मैंने तन्हा घनश्याम को देखा

उमंगे देख कर मेरी वो फूले ना समाते थे
सफ़र में साथ मैं आई जब तेरे नाम को देखा

नशे की लत लगी जिसको उसे अब दोष क्या देना
सुकूं पाने की खातिर उसने हरदम जाम को देखा

बात कुछ भी नहीं होती मगर नज़रें तो मिलती हैं
मैंने तो हर दफा उनमें छुपे पैग़ाम को देखा

हर इक शुरुआत अच्छी थी मगर रस्ते नहीं सूझे
आज टूटी सी रहती हूँ जब से अंजाम को देखा

शिशिर मधुकर

12 Comments

  1. davendra87 davendra87 10/04/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 13/04/2018
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 10/04/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 13/04/2018
  3. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 10/04/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 13/04/2018
  4. ANU MAHESHWARI Anu Maheshwari 10/04/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 13/04/2018
  5. C.M. Sharma C.M. Sharma 13/04/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 13/04/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 13/04/2018

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