बचाना भी है — डी के निवातिया

आँगन

फूलों और कलियों से आँगन सजाना भी है,
कीचड और काँटों से दामन बचाना भी है,
महकेगा चमन-ऐ- गुलिस्तां अपना तभी,
हर मौसम की गर्दिश से इसे बचाना भी है !!

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डी के निवातिया

12 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 07/04/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 21/04/2018
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 07/04/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 21/04/2018
  3. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 07/04/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 21/04/2018
  4. chandramohan kisku Chandramohan Kisku 08/04/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 21/04/2018
  5. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 09/04/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 21/04/2018
  6. Abhishek Rajhans 10/04/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 21/04/2018

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