मेरी Cigarette

आधी से थोड़ी ज्यादा,

पूरी से थोड़ी कम;

आज मेरी Cigarette ने,

बाँटे मुझसे उसके गम।

 

जीतने इल्जाम हमने  उसपे लगाए,

उतने ही सवाल उसने आज पूछे;

अब तुम ही बताओ, गलती किस की!

एतमाद की या ऐहताद की?

 

अपने अंदर की आग बुज़ाने के लिए,

मुझे जलाते हो!

खुद की प्यास मिटाने के लिए,

मुझे पीते हो।

 

बिच बाजार में,

तुमने  आज सरे आम;

व्यसन मुक्ति के नाम,

कर दिया मुझे बदनाम।

 

कभी खुद से थोडी गुफ्तगु करो,

या तो कभी थोडा खुदा से डरो,

छोड़ गया था कोइ तुम्हे,

तब से साथ मेरे क्युँ हो?

 

मैं तुम्हारी तन्हाई मिटती हुँ,

मैं तुम्हारे अकेलेपन का साथ हुँ;

और मैं ही तुम्हारे दुःख में पास हुँ,

तो, फिर क्यूँ,

मुझे अकेले में प्यार,

और बाज़ार में क्यूँ बेकार कहेते हो?

 

©मयूर जसवानी ( Empty)

 

30-12-2017

 

 

One Response

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 07/04/2018

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