कविता

लश्कर ए भेड़ से कभी शेर नही डरते
आज़ादी ने मिलती अगर वो फाँसी न चढते
कभी शांति से कोई मसला नही सुलझता है मेरे दोस्तों
वार्ना सरहद पे सपूतों की लाशें न गिरते

हमेशा हक पाने को आवाज उठाना पड़ेगा
वरना हर भगत सिंह को शूली पे चढ़ जाना पड़ेगा
कब तक जियोगे यूँ जिल्लत की जिंदगी
नही तो खुद की अर्थी को खुद उठाना पड़ेगा

हम तो आये है और कह के चले जायेंगे
ये पैगाम तुम्हारे नाम सरेआम कर जाएंगे
हम तो जिये है शान से उन शहीदों सा
एक दिन हम भी इतिहास के पन्नो में सिमट जाएंगे

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 24/03/2018
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 25/03/2018

Leave a Reply