धुन – डी के निवातिया

धुन

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अब जाए भी तो कहाँ जाए, बचकर बुल और बुलबुल !
हर तरफ जाल बिछाया है, आखेटक ने ख़ौफ़ के तार चुन चुन !
राह अब नज़र कोई आती नहीं, मगर मंज़िल भी जरूर पाना है
हौंसलें ना हारेंगे, जां अपनी वारेंगे, दिल में जगी अब यही धुन धुन !!

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डी के निवातिया

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14 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 22/03/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 31/03/2018
  2. ANU MAHESHWARI Anu Maheshwari 22/03/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 31/03/2018
  3. mukta mukta 22/03/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 31/03/2018
  4. mukta mukta 22/03/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 31/03/2018
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/03/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 31/03/2018
  6. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 23/03/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 31/03/2018
  7. C.M. Sharma C.M. Sharma 24/03/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 31/03/2018

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