मंजर – डी के निवातिया

मंजर

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हर मंजर से गुजर रहे है कुछ लोग,
सियासत में अपना रूतबा जमाने को !
न जाने कितने गुलाब मसल डाले,
फकत अपने नाम का गुल खिलाने को !
न ये गुल रहेंगें जवाँ, न वो गुल,
सभी को मिट जाना है यहां एक दिन !
जानता हर शख्स है असलियत,
फिर जाने क्यों लगा दूजे को मिटाने को !!

@

डी के निवातिया

14 Comments

  1. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 20/03/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 24/03/2018
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 20/03/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 24/03/2018
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 21/03/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 24/03/2018
  4. bhupendradave 21/03/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 24/03/2018
  5. ANU MAHESHWARI Anu Maheshwari 21/03/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 24/03/2018
  6. Madhu tiwari Madhu tiwari 21/03/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 24/03/2018
  7. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 22/03/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 24/03/2018

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