ये व्यवस्था कैसी है

सीनाज़ोरी, रिश्वतखोरी, ये व्यवस्था कैसी है
होती है पग-पग पर चोरी, ये व्यवस्था कैसी है

कष्टों में गुज़रे जीवन, जाने कैसा दौर नया
टूटी आशाओं की डोरी, ये व्यवस्था कैसी है

सबकी ख़ातिर धान उगाये, ख़ुद मगर न खा पाए
दाने को तरसे है होरी, ये व्यवस्था कैसी है

जनता फांके करती है, अन्न सड़े भण्डारों में
भीग रही बारिश में बोरी, ये व्यवस्था कैसी है

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