देवदास

सुना है किसी देवदास को पारो पारो की आवाजें लगाते,
देखा है उसे पारो के ग़म में खुद को मिटाते,

नहीं मिटती दिल में बसी याद आसानी से,
और ना मिटती है किस्मत की लिखी लाख मिटाते,

अब जब भी कोई पारो नाम लेके दुहाई देता है,
मुझको हर गली, कुचे हर मोड़ पे सुने देता है,

सुन ना सके आवाज़ दिल की वो दिल पत्थर भी नहीं,
के दिल का रोना तो ‘योगी’ पत्थर को भी सुनाई देता है,

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One Response

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 14/03/2018

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