बिखरी साँसें कहती जाती

बिखरी साँसें कहती जाती
हर पल को बस खुश रहने दो।
अधरों को मुस्कानों से कुछ
बिखरे मोती चुन लेने दो।

पीड़ा के पलने से उठकर
कुछ कदम जगत में चलने दो
गिरकर उठने का साहस ले
जीने का सार समझने दो।

डर से डर जाने के भय से
मुक्त सभी को हो जाने दो
बार बार जीवन में आती
मँड़राती मौत हटाने दो।

उसमें साहस की कुछ घड़ियाँ
बस पल दो पल तो चलने दो
जग में सिर भी ऊँचा करके
मानव-सा बन कुछ रहने दो।

उसके अंदर विनम्र भाव खुद
शांत चित्त से आ जाने दो
मन मंदिर में धर्म कर्म के
कुछ पुष्प पुण्य के सजने दो।

पीड़ा चिन्ता व्याधि तपन सब
आती है तो आ जाने दो
पर व्यथित दुखित होना इससे
कुछ पल में ही मिट जाने दो

जीना है तो जीना सीखो
यह पाठ सभी को सिखला दो
‘इक पल जीकर मर जाना है’
यह भाव शून्य हो जाने दो।
… भूपेन्द्र कुमार दवे
00000

2 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 10/03/2018
  2. kiran kapur gulati Kiran kapur Gulati 10/03/2018

Leave a Reply to C.M. Sharma Cancel reply