रिश्तों को निभाने के अब हालात बदले हैं

दीवारें ही दीवारें नहीं दीखते अब घर यारों
बड़े शहरों के हालात कैसे आज बदले है.

उलझन आज दिल में है कैसी आज मुश्किल है
समय बदला, जगह बदली क्यों रिश्तें आज बदले हैं

जिसे देखो बही क्यों आज मायूसी में रहता है
दुश्मन दोस्त रंग अपना, समय पर आज बदले हैं

जीवन के सफ़र में जो पाया है सहेजा है
खोया है उसी की चाह में ,ये दिल क्यों मचले है

समय ये आ गया कैसा कि मिलता अब समय ना है
रिश्तों को निभाने के अब हालात बदले हैं

रिश्तों को निभाने के अब हालात बदले हैं
मदन मोहन सक्सेना

2 Comments

  1. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 06/03/2018
  2. kiran kapur gulati Kiran kapur Gulati 09/03/2018

Leave a Reply to Kiran kapur Gulati Cancel reply