आज का विकास

☆आज का विकास☆
क्या चटक है ,दुनिया
बड़ी हसीन नज़र आती है।
अजी !
लाल रंग है जनाब
तभी आँखें चौंधिया जाती हैं।
मुर्दा है,शराफ़त ।
ढोंग है,वफादारी ।
अपनी बात , केवल स्वार्थ ।
खरीदे मुँह,खोखले जज़बात ।
इसमें ही है मजा!
ऐसी जिंदगी ही विकास कहलाती है ।।
ऐसा विकसित हाथी है
तब सोचता ।
जंगल क्या है?
मैं ही हूँ जंगल।
मैं ही यहाँ की शान हूं।
परेशानी होती है ।
जब सच्चाई सामने आती है।
और उस हाथी का
काम-तमाम
एक चींटी कर जाती है ।।

मुक् ता शर्मा

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  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 10/03/2018

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