उड़ना चाहूँ आसमान में

उड़ना चाहूँ आसमान में
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मन गगन
चाहतों की तरंग
बन पतंग सी
उड़ना चाहूँ आसमान में ।।
न ओर न कहीं छोर
मेरे हाथ ही मेरी डोर
बन परिंदा
पंख फैलाना चाहूँ आसमान में ।।
सक्षम हूँ, सजग हूँ
मत रोको की
बन सत्य
सपनों को साकार करना चाहूँ
इस जहान में ।।
बस उड़ना चाहूँ आसमान में ।।
(मु क्ता शर्मा)

6 Comments

  1. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 05/03/2018
    • mukta mukta 05/03/2018
  2. kiran kapur gulati Kiran kapur Gulati 08/03/2018
    • mukta mukta 24/05/2018
  3. C.M. Sharma C.M. Sharma 10/03/2018
    • mukta mukta 24/05/2018

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