नटवरलाल – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

कर्ज बैंकों से लेकर अमीर ,अपना ये देश छोड़ देते हैं
गरीब किसान कर्ज में डूबकर,अपना देह छोड़ देते हैं।

वाह रे माल्या और नीरव जैसे गद्दार,देश के नटवर लाल
क्यों सब के सब मिलकर,अपने देश का उधेड़ रहे खाल।

कानून प्रशासन नेता दवंग,अब आप किसको क्या कहियेगा
भरोसे वाले अधिकारी को,बिन पकड़े ही कैसे चोर कहियेगा।

कभी गोरा कभी काला कभी घोटाला में, फिसल रहा भारत
कभी जात पात,कभी परिवार वाद,में ही पिघल रहा भारत।

बयालिस में बत्तीस चोर, बच के अब कहाँ तक तुम जाओगे
जिधर देखना है देख बिन्दु, पहरा रच के कहाँ तक आओगे।

5 Comments

  1. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 24/02/2018
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 24/02/2018
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 25/02/2018
  4. C.M. Sharma C.M. Sharma 26/02/2018
  5. Kajalsoni 27/02/2018

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