प्यारी

मैं आनंद दायिनी आँगन में
फूलों सा खिलता हूँ
सुगंध फैलता हूँ .

पंख फैलाकर
उड़ती हूँ
अनंत नील आसमान में

शिकारियों की तीक्षन दृष्टि
मुझ पर है
डर लग रहा है ….
बाहर निकलने से डरता हूँ .

कब कही से कोई भेड़िया
आ जायेगा
और उठाकर ले जायेगा
यह सोचकर
मुझे डर लगता है .

मै तुम्हारी सोना बेटी हूँ
कोई भरी बोझ नहीं
तुम्हारी कष्ट की आग को
बुझनेवाली
मैं तो ठंडा पानी हूँ
और तुम्हारी चेहरे की
मुस्कान भी .

3 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 20/02/2018
  2. Kajalsoni 21/02/2018
  3. C.M. Sharma C.M. Sharma 22/02/2018

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