कविता :– जाने वाली, कवि:– अमन नैन

जाने वाले एक बार
लौट कर आना
करी है हमने मोहब्बत तुमसे
यूँ ही ना छोड़ जाना
सावन का महीना
जब भी आता है
याद तेरी दिलाता है
जा से बिछड़े थे हम
वहा ही ले आता है मुझे
दुनिया में लगे है
मैले अपनों के
फिर भी हम है अकेले
तन्हाई के इस आलम में
अँधेरी राते ही लगती है अपनी
शरीर मिल गया मिटटी में
रूह अभी भी चाहती है तुम्हे
तेरे दीदार के नाम पर ये आँखे
आज भी चमक जाती है
मुद्दत हो गई तुमसे मिले
दिल में बैचेनी सी छाई है
आज फिर उसी मोड़ पर अमन
तुमसे मिलने की ख्वाइश हुई हैं

3 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 16/02/2018
  2. Kajalsoni 17/02/2018
  3. Madhu tiwari Madhu tiwari 20/02/2018

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