ऋतु राज वसंत

एक प्यली चाय की चुस्की  के साथ

जैसे कोई अतिथी जाने की बातें करता हैं  ।

वैसे ही ए ऋतु राज वसंत तुम भी

एक लंबे अंतराल के बाद

मुझसे मिलने आते हो।

और आने के साथ ही

जाने की बात करते हो।

तुम्हे हमारी क्या चिंता ?

तुम्हे तो राजा का मतलब

भी नहीं  पता ।

क्यो कि तुम आने से पहले

नोच डालते हो पत्ती पत्ती

उजाड़ देते हो टहनी टहनी

नंगे कर डालते हो पेड़ पौधे।

फिर भी नन्ही कोपल फूटना नहीं छोड़ती

गेहूँ की बालियां चमकना  नहीं छोड़ती

और  धरती अपनी बाहे पसार

तुम्हारा स्वागत करना  नहीं छोड़ती

तुम्हारे डर से ।

तुम राजा हो ना

डराना तेरा स्वभाव है

और न  डरना मेरा स्वभाव।

जानते हो  ऋतु राज वसंत

राजा का मतलब  बहुत गहरा होता है

और  तुम जो करते हो

व राजा का स्वभाव नहीं होता।

क्यो कि राजा से भी ऊपर

कुछ तो होता होगा

जिसके सम्मान में तुम्हें

धरती पर आना  होगा।

क्यो कि तुमसे पहले भी

पूरी पांच ऋतुए

धरती पर आई।

और  मेरे  ऊपर एहसान

उनका रहा तुम्हारा नही।

तुम तो आए और  चलते बने

या आए भी की नही

मुझे पता नहीं।

लेकिन एक दिन तुम्हें आना  होगा

मेरी धरती पर राजा बनकर नहीं

उन ऋतुओं की तरह

जिसने एहसान किया है हम पर।

और  तब मे तुम्हारा स्वागत

खुले दिल से बाहे पसार कर

कोयलकी कुक  पपीहे  के पीहु

और  सरसो की क्यारियो के बीच करुगी

ए ऋतु राज वसंत।

Bhawana kumari

 

 

 

 

12 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 01/02/2018
    • Bhawana Kumari Bhawana Kumari 02/02/2018
  2. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 01/02/2018
    • Bhawana Kumari Bhawana Kumari 02/02/2018
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 02/02/2018
    • Bhawana Kumari Bhawana Kumari 02/02/2018
  4. ANU MAHESHWARI Anu Maheshwari 02/02/2018
    • Bhawana Kumari Bhawana Kumari 02/02/2018
  5. Kajalsoni 02/02/2018
    • Bhawana Kumari Bhawana Kumari 04/02/2018
  6. Madhu tiwari Madhu tiwari 03/02/2018
    • Bhawana Kumari Bhawana Kumari 04/02/2018

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