रेसिपी— “जिन्दगी”

दो चम्मच बारीक
कटी हुई मुस्कुराहट मे,
हल्की सी मद्धिम आंच पर
कुछ दो चार दाने यादों के छिड़क ।
अंश्कों के तेल मे
छौका लगा उम्मीदों का…
बस कुछ देर ठहरने तो दे,
वादों के कलछुल को
अपनों से गले मिलने तो दे ।
अब ढाँप के रख,
धैर्य के बड़े प्लेट से,
ताकि निकल ना जाये
कुछ एहसास धुआँ बन के ।
सारे मौजूद रहेंगे,
तभी तो बनेगी
ज़िंदगी की लज़ीज़ डिश…

कपिल जैन

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  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 03/03/2018

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