सुनो चाँद, कल ना…. काला टीका लगा कर आना

बारिश में न रात
जल्दी आ जाया करती है
दुकान से घर लौटते वक़्त
अँधेरा हो जाता है
सड़क पर चारो तरफ भीड़ …
ट्रैफिक का शोर….
तकरीबन पन्द्रह मिनट लगते है
रास्ता तय करने में……
कोई है ! जो मेरा
हमसफ़र बनता है इस बीच
कल देखा था आसमां पर
जब पीले- पीले बदन पर
लाल साफा बाँध कर आया था
बस! देखा किये उसे हम।
रास्ते भर लुका-छिपी चली हमारी
बैरी इमारते बीच में आ जाती हैं हमारे
रोज़ घर तक पहुंचा जाता है हमको
फिर हम मुस्कुरा कर
जुदा होते हैं एक दूजे से।
जीवन की उहा-पोह में…
हमनवां के साथ
गुज़रे वो पन्द्रह मिनट
कुछ अरमां, कुछ सपने
दे जाते हैं
जो ऊर्जा बन पूरे दिन
साथ रहते हैं
और फिर
नज़्म बन कागज़ पर
छा जाते हैं।
सुनो चाँद! कल ना….
काला टीका लगा कर आना
सरेआम तुझसे
मोहब्बत का
इकरार किया है हमने
डर है ज़माने की
नज़र न लग जाये

कपिल जैन

11 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 21/01/2018
    • कपिल जैन कपिल जैन 27/01/2018
  2. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 21/01/2018
  3. डी. के. निवातिया dknivatiya 21/01/2018
  4. C.M. Sharma C.M. Sharma 22/01/2018
  5. अखिलेश प्रकाश श्रीवास्तव AKHILESH PRAKASH SRIVASTAVA. 23/01/2018
    • कपिल जैन कपिल जैन 27/01/2018
  6. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 24/01/2018
    • कपिल जैन कपिल जैन 27/01/2018
  7. Kajalsoni 25/01/2018
    • कपिल जैन कपिल जैन 27/01/2018

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