~~ प्रेम ~~

समय की सिलवटों में
मेरे प्यार
की सीवन नहीं
उधड़ी है
समय-समय पर
मिल कर हम ने
उसकी सिलाई
पक्की की है।
फर्क बस इतना है कि
उसे जताने
या दिखाने की
छत की मुंडेर से
चिल्लाने की
अब जरूरत नहीं।
न दरकार है,
पुरानी यादों की,
या पूरे-अधूरे वादों की,
अब दिखता नहीं
सिर्फ महसूस होता है
सतह पर जमा प्यार
अब गहरे पैठ गया है…

कपिल जैन

5 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 21/01/2018
  2. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 21/01/2018
  3. C.M. Sharma C.M. Sharma 22/01/2018
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 22/01/2018
  5. Kajalsoni 25/01/2018

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