लाचार अब तंग तिरंगा है – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

अमीरों के लिये क्या? गरीबों के लिए महंगा है
दुनिया में हर जगह हर तरफ यही तो पंगा है।

पांच सदस्य दस जगह दस शहरों में दस महल
भूखे गरीब दस, एक झोपड़ी फिर भी नंगा है।

विकास क्या होंगे देश के, लोग कहाँ सुधर रहे
घूस लेना जारी, घोटालों में फंसा आज दंगा है।

तनख्वाह कुछ और माल करोड़ों का, कहाँ से लाए
पकड़े गये तो क्या गम, हाथ धोने को जो गंगा है।

अपना सोच बदल, क्या करेगा बिन्दु हिन्दुस्तान में
खाऊ सरकारी लोगों से,लाचार अब तंग तिरंगा है।

6 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 20/01/2018
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 20/01/2018
  3. ANU MAHESHWARI Anu Maheshwari 20/01/2018
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 21/01/2018
  5. अखिलेश प्रकाश श्रीवास्तव AKHILESH PRAKASH SRIVASTAVA. 23/01/2018
  6. Kajalsoni 25/01/2018

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