दर्द का दरिया-अरुण त्रिपाठी

*दर्द का दरिया निगलना है तुझे*
बह्र 2122 2122 2122 212

सुन समन्दर, दर्द का दरिया निगलना है तुझे।
खुद ब खुद तूफ़ान से लड़कर निकलना है तुझे।

झेलना है हर सितम जालिम ज़माने की अगर,
हिमशिखर सा टूटकर खुद ही पिघलना है तुझे।

क्या तेरा मजहब जहाँ में सोच कर तू देख ले,
जाति मजहब की गणित को भी बदलना है तुझे।

नाग जो भी सर उठाये दिख रहे हैं आजकल,
पैतरे से सर उन्हीं का अब कुचलना है तुझे

सीख ले लहरों से तू भी गिर के उठने का हुनर,
ठोकरों की मार से गिर के सम्हलना है तुझे।

पेट पापी जल रहा है अब भी तेरा भूख से,
झेलकर इस ताप को साँचे में ढलना है तुझे।

-‘अरुण’

22 Comments

  1. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 16/01/2018
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 16/01/2018
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 16/01/2018
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 16/01/2018
  3. Kajalsoni 16/01/2018
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 16/01/2018
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 24/01/2018
  4. C.M. Sharma C.M. Sharma 17/01/2018
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 17/01/2018
  5. Rajeev Gupta Rajeev Gupta 17/01/2018
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 17/01/2018
  6. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 17/01/2018
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 17/01/2018
  7. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 17/01/2018
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 17/01/2018
  8. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 18/01/2018
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 18/01/2018
  9. Madhu tiwari Madhu tiwari 18/01/2018
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 18/01/2018
  10. अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 18/01/2018
  11. Ram Gopal Sankhla Ram Gopal Sankhla 27/01/2018
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 29/01/2018

Leave a Reply