रात आती है – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

रात आती है चली जाती है
न जाने कौन सी रात आखरी होगी।
ऐसे मिलते हैं बिछड़ जाते हैं
न जाने कौन सी मुलाकात आखिरी होगी।

गम होता है तो रो लेते हैं
दर्द अपना नहीं हम देते हैं
मुश्किलें आती हैं चली जाती हैं
न जाने कौन सी कयामत आखिरी होगी।

नफरत गुस्सा ये अहंकार किसके लिए
भाई – भाई में टकरार किसके लिए
वक्त आता है निकल जाता है
न जाने कौन सी कयानात आखरी होगी।

न कुछ लाए थे न कुछ साथ जायेगा
मिट्टी का खिलौना मिट्टी में मिल जायेगा
रिश्ते बनते हैं बिछड़ जाते हैं
न जाने कौन सी ये घात आखिरी होगी।

6 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 16/01/2018
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 16/01/2018
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 16/01/2018
  4. Rajeev Gupta Rajeev Gupta 16/01/2018
  5. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 16/01/2018
  6. Kajalsoni 16/01/2018

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