मेरी कलम 9……काजल सोनी

खुबसूरत सा चाँद भी शर्माता है ,
जब आँचल तुम लहराती हो ।

घटा भी जोर से बरस पड़ती है,
जब काजल तुम लगाती हो ।

तेरे माथे की बिंदीया के आगे
जैसे चाँदनी भी छुप जाती हो ।

तुम अपनी जुल्फे बिखरा कर ,
क्यूँ पागल मुझे बनाती हो ।

कोयल सी बोली है तुम्हारी ,
जैसे सबका दिल धड़काती हो।

हया तेरी जान ले जायें ,
होश सबके उड़ा जाती हो ।

लगती हो कुछ ऐसे प्यारी ,
बस पल पल दिल में समा जाती हो ।।

” काजल सोनी ”

7 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 15/01/2018
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 15/01/2018
  3. Rajeev Gupta Rajeev Gupta 15/01/2018
  4. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 15/01/2018
  5. C.M. Sharma C.M. Sharma 16/01/2018
  6. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 16/01/2018
  7. Madhu tiwari Madhu tiwari 19/01/2018

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