सांस जब तक है,

तभी तक जिंदगी है |

डोर टूट जाये ,

तो फिर ना कोई बंदगी है |

चमन में बहारे ,

रंगीन नजारें,दरिया के किनारे ,

अपनों के सहारे |

ये सब होते साँसों से प्यारे |

रिश्तों के भंवर में खोये हैं सभी ,

ख्वाबों के शहर में रोये हैं कभी |

ये हर किसी की है असली निशानी ,

बिना दर्द के नही कटती जिंदगानी |

मेरे शब्द भी एक हक़ीक़त जुबानी,

सांस ही है हमारी असली निशानी |

सांस जब तक है,

तभी तक जिंदगी है |

डोर टूट जाये,

तो फिर ना कोई बंदगी है ||

 

शिवेन्द्र सिंह

3 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 11/01/2018
  2. Kajalsoni 11/01/2018
  3. C.M. Sharma C.M. Sharma 12/01/2018

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