कविता :– साधु का जीवन , कवि :– अमन नैन

जिंदगी हमारी साधु की
सादा भेष सादा बाना हमारा
कर्म हमरा चलते रहना
कभी ना एक जगह ठहरना
काम हमारा मांग कर खाना
प्रभु का गुणगान करते रहना
बुरा किसी का करते नही
गलत के आगे कभी ना झुकते
सत्य के साथ आगे चलते रहते
इंसान को इंसानियत का रास्ता दिखाते
सभी की सेवा करना यही कर्तव्य हमारा
लालच ना माया का
न तृष्णा किसी वस्तु की
कर दी नाम ईश्वर के
यह काया अपने शरीर की
अमरनाथ गुरु का नाम सबसे पवित्र
ले नाम गुरु का अपनी जिंदगी सुधार ले
नाथो के नाथ से अपना नाता जोड़ ले
कर सेवा गुरु गोरखनाथ की
उनकेे चरणों की धूल में
खुद को मिटा दे

3 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 11/01/2018
  2. Kajalsoni 11/01/2018
  3. C.M. Sharma C.M. Sharma 12/01/2018

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