कितने भोले कितने प्यारे

कितने भोले प्यारे बच्चे

हाथो में किताब की जगह

लेकर घूमते bore  है ।

उन bore में कचरे चुन चुन

दिन भर करते  मेहनत है

आंखों में है सिर्फ़ विवशता

भुखे पेट व सोते हैं ।

उनकी  भी होती है इच्छा

School  college जाने की

पर व कहते है सबसे

हम  तो भाग्य के मारे है

 

मेरा भाग्य कौन लिखेगा

जब सरकार ही छल कपट में है

नहीं है मेरा  ठौर    ठिकाना

सड़क के  किनारे   sote हैं ।

एक वक्त का खाना खा कर

dushit  पानी  पीते है

हम भी है  इन्सान के बच्चे

पर न  घर में रहते है ।

Bhawana kumari

 

10 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 07/01/2018
    • Bhawana Kumari Bhawana Kumari 08/01/2018
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 08/01/2018
    • Bhawana Kumari Bhawana Kumari 08/01/2018
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 08/01/2018
  4. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 08/01/2018
  5. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 10/01/2018
    • Bhawana Kumari Bhawana Kumari 10/01/2018
  6. Kajalsoni 11/01/2018
  7. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 11/01/2018

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