ऐ नौकरी

कितनी सिद्दत से चाहा तुझे
हर पल बस चाहा तुझे
घर छोड़ा परिवार छोड़ा
हुस्न का दीदार छोड़ा
गाना छोड़ा गुनगुनाना छोड़ा
तुम्हे पाने की जिद में
महीने -महीने नहाना छोड़ा
ज़िन्दगी हसीं थी
जी सकते थे शान से
तुम्हे पाने की खातिर
लम्हे–लम्हे का हिसाब रखा
करवटो के संग बस तुझे याद रखा
दुनिया जब सोती थी
फिर भी तेरी खातिर जगा रहा
नींद को आँखों से दूर रखा
तू फिर भी मुझे तड़पाती रही
मुझसे दूर हर साल जाती रही
ऐ नौकरी तू कब आएगी
ऐ नौकरी बता तू कब आएगी–अभिषेक राजहंस

6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/01/2018
  2. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 07/01/2018
  3. Madhu tiwari Madhu tiwari 07/01/2018
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 08/01/2018
  5. Kajalsoni 08/01/2018

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