उन्हें हम प्यार करते हैं,,,,,

झुकी हुई नज़रों से ये इज़हार करते हैं
खुद से ज्यादा उन्हें हम प्यार करते हैं
सुर्ख़ लबों पर कितने गुलाब खिल उठें
चूमकर पेशानी जब वो इक़रार करते हैं,
झुकी हुई नज़रों से ये इज़हार करते हैं
खुद से ज्यादा उन्हें हम प्यार करते हैं,,,,,,,,

तसव्वुर में हम खो गए इस क़दर
सारी दुनिया से हम हो गए बेख़बर
कितने हसीं हैं उनके ख़यालों के मंज़र
कि दर्द सारे मेरे हो गए हैं बेअसर,
बंद आँखों से हम उनका दीदार करते हैं,
झुकी हुई नज़रों से ये इज़हार करते हैं
खुद से ज्यादा उन्हें हम प्यार करते हैं,,,,,,,,

बज उठी है फ़िज़ाओं में एक रागिनी
अम्बर से बरसने लगी है चाँदनी
ये हवाएं भी करती हैं सरगोशियाँ
घुल गई है नज़ारों में क्यों चाशनी
अब सितारें भी उनका इंतज़ार करते हैं
झुकी हुई नज़रों से ये इज़हार करते हैं
खुद से ज्यादा उन्हें हम प्यार करते हैं,,,,,,,,।।

सीमा “अपराजिता “

11 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 04/01/2018
    • सीमा वर्मा सीमा वर्मा 04/01/2018
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 05/01/2018
    • सीमा वर्मा सीमा वर्मा 05/01/2018
  3. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 05/01/2018
    • सीमा वर्मा सीमा वर्मा 05/01/2018
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 05/01/2018
    • सीमा वर्मा सीमा वर्मा 05/01/2018
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/01/2018
  6. Kajalsoni 08/01/2018

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