” बुढ़ी माँ “…….. काजल सोनी

बुढ़ी माँ कोने में बैठी , अपना दर्द छुपाये ।
रहीस बेटा बांटें सबको, माँ देख देख ललाये ।

छुप छुप के ममता रोये , पर रहती है मुसकाये ।
सुखी रोटी बासी सब्जी, मिले जो खुशी से खाये ।

खुन सींच कर पाला जिसको, अब उंगली कैसे उठाये ।
छोटी सी गलती क्या होवे ,बेटा बुढ़ी माँ को ही हडकाये।

मान न जाने बेटा ही , तो बहु कैसे भाये ।
अपमान होता देख कर भी , बेटा चले मुंह छुपाये ।

बुढ़ी माँ किस काम की , दिया कुत्तों की सेवा में लगाये।
माँ को आँख दिखा कर बोले , कुत्तों को पुचकाये ।

हालत ऐसी बुढ़ी माँ की हो गई ,कौन किसे समझाये ।
सेवा जो बुढ़ी माँ की न करै,वो ईश्वर को भी न भाये ।

माँ के चरणों से बड़ा जग में , तीरथ कोई न होये ।
घर उसके दुख दरिद्रता बसे,जिसकी बुढ़ी माँ भुखी सोये।

” काजल सोनी ”

6 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 01/01/2018
  2. ANU MAHESHWARI Anu Maheshwari 02/01/2018
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 02/01/2018
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 02/01/2018

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