मेरी मोहब्बत को तुम सार दे गए – मनुराज वार्ष्णेय

मेरी मोहब्बत को तुम सार दे गए
जिसकी कमी थी मुझको वो प्यार दे गए

नैनों में जो राज अब तक छुपे थे
देकर मोहब्बत वो इनको पार कर गए

तेरी ही यादें ही याद रहती मुझको
जैसे महकता कोई गुलजार दे गए

बंदिशें जमाने की सारी हमने जीती थी
छीन के दिल को वो हमको हार दे गए

मेरे गीत गजलों को ऐसा रूप दे गए
छेड़ी ऐसी धुन कि दिले बेकरार दे गए

गम के ही तो बादलों का था बसेरा मुझ पर
आये जो तुम तो खुशियाँ हजार दे गए

रातों की नींदों को मुझसे दूर ले गए
था बचा जो अब तक वो भी सुकून ले गए

एक नया नाम तुम भी मुझसे ले गए
जान हो तुम मेरी दिल को चुरा जो ले गए

चेहरा उदास जो उसने मेरा देखा
देखा हमको हँसके बाहों में खींच ले गए

कवि – मनुराज वार्ष्णेय

21 Comments

  1. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 29/12/2017
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 29/12/2017
  3. Kajalsoni 29/12/2017
  4. C.M. Sharma C.M. Sharma 30/12/2017
  5. Madhu tiwari Madhu tiwari 30/12/2017
  6. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 30/12/2017
  7. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 30/12/2017
  8. Bhawana Kumari Bhawana kumari 30/12/2017

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