” मेरी कलम” …….काजल सोनी

इस बेबुनियाद दुनिया में ,
न किसी की चलती है ।
ये घटा खूद ही बरसती है ,
ये हवा खूद ही चलती है ।

मै जो महसूस करती हूँ ,
उसे लफ्जों में कहती हूँ ।
गर है मुहब्बत किसी को किसी से ,
तो वो खुद ही बहकती है
और खुद ही तरसती है ।

है दीवानगी की ये फितरत ,
भीड़ में भी तन्हा रहती है ।
न किसी की ये सुनती है ,
न किसी को ये समझती है ।

जिंदगी का है ये तजुर्बा ,
जीना है कितनी भी मुश्किलों में ।
तो वह खुद ही गिरती है
और खुद ही सम्हलती है ।

वक्त को थाम लो हर पल ,
ये मुड़कर फिर न मिलती है ।
इस बेबुनियाद दुनिया में
न किसी की चलती है ।।

” काजल सोनी ”

14 Comments

    • Kajalsoni 26/12/2017
  1. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 23/12/2017
    • Kajalsoni 26/12/2017
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/12/2017
    • Kajalsoni 26/12/2017
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 23/12/2017
    • Kajalsoni 26/12/2017
  4. Madhu tiwari Madhu tiwari 23/12/2017
    • Kajalsoni 26/12/2017
  5. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 24/12/2017
    • Kajalsoni 26/12/2017
  6. C.M. Sharma C.M. Sharma 25/12/2017
  7. Kajalsoni 26/12/2017

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