किस बात का है इंतज़ार

शीर्षक-किस बात का है इंतज़ार

किस बात का है तुम्हे इंतजार
क्यों हो रहा है तू बेजार
रास्ते हो चाहे मुश्किल जितने
अपने पांव से सफ़र कर यार
चट्टानों में भी पड़ती है दरख्त
तू होंसला मत हार
हथोड़े को बना हथियार
तू तोड़ दे डर की दीवार

किस बात का है तुम्हे इंतज़ार
उम्मीदों को ना तू तोड़ यूंही
हार करवाती है बस जीत का इंतज़ार
अँधेरा घना है,जानते है सब
रात के बीतने तक
उजाले का ना कर इंतज़ार
रात को भी जीत ले तू यार
एक दिन तो बहके रहेगी ,खुशियों की बहार
हौसला मत हार
तू हौंसला मत हार—-अभिषेक राजहंस

7 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 21/12/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 21/12/2017
  3. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 21/12/2017
  4. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 21/12/2017
  5. Kajalsoni 21/12/2017
  6. Arun Kant Shukla अरुण कान्त शुक्ला 22/12/2017

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