मन पयोधि.._अरुण कुमार तिवारी

*मन पयोधि..*
(अतुकांत)

उछल-उछल कर,
उथल-पुथल कर
छूती रहतीं
तटबन्धों को,
अगनित-अगनित भाव
लिये उल्लास,प्रीति रस।
मन पयोधि की
चंचल लहरें।

कभी मातृ सा,
स्नेह लुटाती
सहलाती हैं,
हौले-हौले।
बात अनगिनत,
कर जाती हैं
बिन कुछ बोले।
हर दुःख हर लेने
को आतुर,
मन पयोधि की
शीतल लहरें।

कभी लूटती
चट्टानों की
दृढ़वत तन्द्रा,
करती कठिन प्रहार
बहुत कुछ
कह जाने को।
लड़ उठती हैं
मौन पड़ा व्रत
तुड़वाने को।
मन पयोधि की
अविचल लहरें।

आशा का संचार लिए
नव जीवन
भाषा सार लिए
सिखलातीं लड़ना
जूझ जूझ कर
मिटते जाना
या फिर
विजयी होना।
मन पयोधि की
अविचल लहरें।
मन पयोधि में।

-‘अरुण’

18 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 21/12/2017
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 21/12/2017
  2. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 21/12/2017
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 21/12/2017
  3. C.M. Sharma C.M. Sharma 21/12/2017
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 21/12/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 21/12/2017
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 21/12/2017
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 21/12/2017
  5. Kajalsoni 21/12/2017
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 21/12/2017
  6. Arun Kant Shukla अरुण कान्त शुक्ला 22/12/2017
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 25/12/2017
  7. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 23/12/2017
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 25/12/2017
  8. अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 25/12/2017
  9. Madhu tiwari Madhu tiwari 26/12/2017

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