कुछ तो कहानी थी

शीर्षक — कुछ तो कहानी थी

तेरी -मेरी कुछ तो कहानी थी
कुछ तो हुआ होगा
जो तुम्हे जोड़ता था मुझसे
मुझे जोड़ता था तुमसे
मैं तो रस्ते का कोई फ़क़ीर था
मेरे हाथों पे तेरे साथ का लकीर था
तेरा प्यार ही तो मेरा तकदीर था
जो तुम थी तो मैं भी था
मेरी साँसे थी साँसों में तेरा हिस्सा था
जुबां पे हर किसी के
हमारे प्यार का किस्सा था
आँखे जज्बाते कह जाती थी
धड़कने तेज हो जाती थी
जुबां चिपक से जाते थे
इशारों में ही बाते होती थी
तुम बार बार दुपट्टा संभालती थी
मैं कलम जानबुझ कर गिरा कर
चोर नजरो से तुम्हे देखता था
ये प्यार ही तो था
जो तुम रास्ते पे चलते हुए
सखियों से बात करते हुए
मुड़-मुड़ कर मुझे ताकती थी
कभी मुस्कुरा कर
कभी शर्मा कर सिर मुड़ा लेती थी
ये प्यार ही तो था
तेरी मेरी कुछ तो कहानी थी–अभिषेक राजहंस

7 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 19/12/2017
    • Abhishek Rajhans 19/12/2017
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 20/12/2017
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 20/12/2017
  4. Kajalsoni 21/12/2017

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