इंसानी फितरत — डी के निवातिया

इंसानी फितरत

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अपने पराये के फेर में दुनिया रहती है
इंसानी फितरत है ये मेरी माँ कहती है
हर दुःख दर्द का इलाज़ है आत्ममंथन
कहने को भावो में तो दुनिया बहती है !!

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डी के निवातिया

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16 Comments

  1. अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 16/12/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 20/12/2017
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 17/12/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 20/12/2017
  3. Arun Kant Shukla अरुण कान्त शुक्ला 17/12/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 20/12/2017
  4. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 18/12/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 20/12/2017
  5. C.M. Sharma C.M. Sharma 18/12/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 20/12/2017
  6. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 18/12/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 20/12/2017
  7. Rajeev Gupta Rajeev Gupta 19/12/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 20/12/2017
  8. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 19/12/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 20/12/2017

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