मत बांधो

*मुझे मत बाँधो..*
(अतुकांत)

मैं,
चलती
बहती,
तैरती हूँ,
उन्मुक्त गगन में।
गहरे,
छिछले,
भावों के सागर में|
लहरों के ऊपर,
या उसकी तलहटी में।
उषा की किरणों में,
छिपकर,
हौले से,
निहारती हूँ
वत्सल वसुधा को।
कभी-कभी,
हृदय के,
स्निग्ध कुहासे से,
खिल उठती हूँ,
ओस की बूँद बन।
मचल उठती हूँ,
उच्छश्रृंख्ल हो,
तरंगिणी सी।
या नवयौवन युक्त
शावक सा।
कभी तो,
खिल उठती हूँ,
विरह में भी।
मैं,
भावों की सविता हूँ।
मुझे मत बाँधों।
जी लेने दो!
मैं,कविता हूँ।
मैं कविता हूँ।

-‘अरुण’

17 Comments

  1. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 15/12/2017
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 15/12/2017
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 16/12/2017
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 16/12/2017
  3. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 16/12/2017
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 16/12/2017
  4. Arun Kant Shukla अरुण कान्त शुक्ला 16/12/2017
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 16/12/2017
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 16/12/2017
  5. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 16/12/2017
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 16/12/2017
  6. अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 16/12/2017
  7. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 18/12/2017
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 18/12/2017
  8. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 19/12/2017
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 21/12/2017

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