माँ

आज तुम्हारी बहुत याद आती है माँ।

जब भी उदास होती हूँ

तुम साये की तरह साथ रहती हो ma

कितनी भी तकलीफ क्यो न हो

फिर भी खुश रहती हूँ माँ

 

मुझसे प्यार की उम्मीद सभी करते है

पर प्यार के लिए आज तरसती हूँ माँ।

जब भी ठोकर खाकर गीरती हूँ

तो खुद ही अपने को संभालती हूँ माँ

 

जब भी तेरी गोद याद आती हैं

तब खुद की गोद में सर रख सोती हूँ माँ।

तुमने खुशियो के साथ हमे विदा किया था

पर आज हर दर्द में तुम याद आती हो ।

जब भी करूं आशा किसी से

तो सिर्फ़ दुत्कार ही सुनने को मिलती है ।

जिम्मेदारी जो तुमनें कंधे पर डाली थी

उसे पूरा करने की हर कोशिश करती हूँ माँ।

 

 

 

 

सभी को समेटने की कोशिश maa

हर रोज खुद ही बिखरती जाती हूँ माँ।

सबकी इच्छा पूरी करती हूँ

पर खुद की झोली खाली रहती है ।

सबकी तन्हाइयां दूर करती हूँ

पर खुद तन्हा होती हूँ तो रोती हूँ माँ

तब रोज रात को सपनो में

तुम मेरे सर को चूमब्ती हो  माँ

कहती हो तुम लाडो हूँ मैं तेरी

पर क्या अब भी उतना ही लाड करती हो माँ ।

 

6 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 16/12/2017
    • Bhawana Kumari Bhawana Kumari 16/12/2017
    • Bhawana Kumari Bhawana Kumari 16/12/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 16/12/2017
    • Bhawana Kumari Bhawana Kumari 16/12/2017

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