ख़्वाब सो रहे हैं

बेसुध-बेफिक्र कुछ ख़्वाब सो रहे हैं,
इन्हें सोने दो।
अलसाए-सुस्ताये से अँगड़ाई लेते ख़्वाब,
इन्हें सोने दो।
सुना है ख़्वाबों की आँखें नहीं होती,
पर नींद तो इन्हें भी आती होगी,
कहने-सुनने की इनकी भी तो कुछ बातें होंगी,
इनकी भी तो अपनी सुबह, अपनी रातें होंगी…

अबके सोना तो इन्हें अपनी नींदों में न लाना,
वक़्त-बेवक़्त इन्हें न जगाना, न बुलाना,
न करना इनसे आँख-मिचोली,
रहने देना हंसी-ठिठोली..
क्योंकि..
बेसुध-बेफिक्र कुछ ख़्वाब सो रहे हैं,
इन्हें सोने दो।
अलसाए-सुस्ताये से अँगड़ाई लेते ख़्वाब,
इन्हें सोने दो।

6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 13/12/2017
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 13/12/2017
  3. Madhu tiwari Madhu tiwari 13/12/2017
  4. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 13/12/2017
  5. Arun Kant Shukla अरुण कान्त शुक्ला 14/12/2017
    • Garima Mishra Garima Mishra 26/12/2017

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