काश

काश काश काश

काश कि ये किया होता
काश कि वो ना किया होता

काश कि ऐसा सोचा होता
काश कि वैसा ना सोचा होता

काश काश काश

काश शब्द जब गुन्जता मन के आकाश में

बहूत सारी बातें आतीं फिर हमारे सोच-विचार में

बार-बार देखते पलटकर पन्ने पिछले सारे

फिर आंखों के आगे आते अफसोस के बादल काले

पर

काश काश काश

काश तो है खास

काश अपने पीछे ही छुपाकर लाई है ढ़ेरों आस

जब छटेंगी सोच से ये काली-काली घटाऐं

फिर बारिश के छिट्टों संग पड़ेंगी बेहतरी की आशाऐं

अगर जब-जब ज़िंदगी में आ धमके काश

तो समझो होने वाला है कुछ बेहतर और कुछ खास ।

5 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/12/2017
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 12/12/2017
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 12/12/2017
  4. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 13/12/2017
  5. Madhu tiwari Madhu tiwari 13/12/2017

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