सृजन फिर से नया होगा – शिशिर मधुकर

अँधेरे जब कभी इंसान के जीवन में आते हैं
तभी तो चाँद दिखता है ये तारे टिमटिमाते हैं

सरद रातें हुईं लम्बी तो ग़म किस बात का प्यारे
सुबह की आस में फिर से चलो दीपक जलाते हैं

घना कोहरा है राहों में नज़र कुछ भी नहीं आता
चलो फिर से मुहब्बत की घनी बारिश कराते हैं

पात शाखों से झरते हैं रवि मायूस रहता है
सृजन फिर से नया होगा चलो कसमें निभाते हैं

बर्फ जब भी पिघलती है नीर नदियों में बहता है
खुशी का राग कानो में फिर तो झरने सुनाते हैं

शिशिर मधुकर

14 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 09/12/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 09/12/2017
  2. अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 09/12/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 10/12/2017
  3. डी. के. निवातिया Dknivatiya 10/12/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/12/2017
  4. Vimal Kumar Shukla Vimal Kumar Shukla 10/12/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/12/2017
  5. C.M. Sharma C.M. Sharma 11/12/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/12/2017
  6. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 11/12/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/12/2017
  7. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 13/12/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 14/12/2017

Leave a Reply