यादों के पन्ने से…..

हर शाम….
नई सुबह का इंतेजार
हर सुबह….
वो ममता का दुलार
ना ख्वाहिश,ना आरज़ू
ना किसी आस पे
ज़िंदगी गुजरती थी…

हर बात….
पे वो जिद्द अपनी
मिलने की….
वो उम्मीद अपनी
था वक़्त हमारी मुठ्ठी मे
मर्ज़ी के बादशाह थे हम
थें लड़ते भी,थें रूठते भी
फिर भी बे-गुनाह थें हम

वो सादगी कहीं खो गई
शराफ़त ने चोला ओढ़ ली
कुछ यूँ…
रफ़्तार ज़िंदगी ने ली
मर्ज़ी ने दम तोड़ दी……….

अल्फ़ाज़ मेरे दिल के…….IBN
Blog-http://merealfaazinder.blogspot.in

10 Comments

  1. Vikram jajbaati Vikram jajbaati 04/12/2017
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/12/2017
  3. C.M. Sharma C.M. Sharma 05/12/2017
  4. Arun Kant Shukla अरुण कान्त शुक्ला 05/12/2017
  5. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 06/12/2017

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