-अपनी यादों को मिटा जाओ

शीर्षक–अपनी यादों को मिटा जाओ

इतना यकीन है मुझे
की तुमने मुझे भुला दिया है
नफरतो के लिहाफ जो ओढ़ लिए तुमने
कुछ मेरे गमो को तो भुला जाओ
अपनी यादो को मिटा जाओ

वो जो प्यार किया मैंने तुम्हे
वो प्यार तो लौटा जाओ
दिल के दीवार पे जो दरख्त दिया है
उस दीवार को तो बता जाओ
अपनी यादो को मिटा जाओ

वो जो कमरे में आईना है तेरा
उसमे से अपनी सूरत तो मिटा जाओ
बंद से पड़े उस रोशनदान की रौशनी जो ले गई
जरा उसकी रौशनी तो लौटा जाओ
अपनी यादो को मिटा जाओ

वो जो दरवाजा है कमरे में
तुम लौट के ना आओगी
उसे जरा बता जाओ
जाते- जाते कुण्डी लगा जाओ
अपनी यादो को मिटा जाओ

वो जो ख़त है तुम्हारे लिखे हुए
वो जो गुलाब है सूखे हुए
जरा उसे मिटा जाओ
मेरे हिस्से के आंसू तो बहा जाओ
अपनी यादो को मिटा जाओ —-अभिषेक राजहंस

One Response

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 01/12/2017

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