कुछ ऐसा हो

शीर्षक- कुछ ऐसा हो

कुछ ऐसा हो
तेरे मेरे बीच में
तुम तुम ना रहो
मैं मैं ना रहूँ

एक कप हो
कॉफ़ी की प्याली
पीने वाले दो हो जाएँ
मैं शक्कर सा घुल जाऊं
कुछ तुम पी लो
कुछ मैं पी जाऊं

आसमां में जैसे हो बादल
मैं देखूँ तुम्हे बन बादल
तुम मोरनी बन झूम जाओ
मैं बारिश बन बरस जाऊं
तुम भी भींग जाओ
मैं भी भींग जाऊं

आँखों में काजल काली
तू फूल मेरी मैं वनमाली
तुम शरमाई सकुचाई सी पंखुड़ी
मैं छू लूँ तुम्हे
मैं जी लूँ तुम्हे

मैं चन्दन तेरा
तू पूजा की थाली
मैं तेरे हाथों की मेहँदी
तू मेरे अंगूठी की मोती

सिनेमा की हो दो कार्नर की सीटे
तू आइस्क्रीम मेरी पिघलती हुई
मैं पॉपकॉर्न तेरा कुरकुरा
मैं गोलगप्पा तेरा
तू खट्टी सी इमली मेरी
आ चख लूँ तुम्हे
तुम चख लो मुझे
मैं जी लूँ तुम्हे
तू जी ले मुझे ———–अभिषेक राजहंस

One Response

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 01/12/2017

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