ये नश्वर मिट्टी का पुतला…

*ये नश्वर मिट्टी का पुतला….*

अरकान 22 22 22 22 22 22 22 22

सच्ची तस्वीर छिपी जिसमे,दर्पण वो दिखलाये कोई।
है जानी पहचानी उलझन,ये उलझन सुलझाये कोई।

है मृत्यु अगर अंतिम सच तो,जीवन की क्या सच्चाई है।
है पार छिपा क्या जीवन के,ये बन्धन समझाये कोई।

ढोंगी कामी जग कल्याणी,घट घट दिखते नव ज्ञान लिये।
वाणी जिसमे हो सत्य अटल,सद् वाणी कह जाए कोई।

क्या है करुणा क्या पर पीड़ा,परहित है क्या कुछ ज्ञान नहीं।
ऐसे निष्ठुर को फर्क नहीं,जीये या मर जाये कोई।

जनती माता करती सेवा,ये नस्वर मिट्टी का पुतला।
टूटे जब जीवन के बन्धन,क्यों पुतला ले जाये कोई।

आना-जाना,खोना-पाना, मुस्किल क्यों इतना समझाना।
ये है कैसा सौदा भगवन,खोये कोई पाये कोई।

-‘अरुण’

8 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 30/11/2017
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 04/12/2017
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 01/12/2017
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 04/12/2017
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 01/12/2017
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 04/12/2017
  4. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 02/12/2017
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 04/12/2017

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