रूठा सारा संसार पिये…

*रूठा सारा संसार पिये..*

अरकान 22 22 22 22 22 22 22 22

मेरे भी कोमल अंग सभी, मुझमें भी है रसधार पिये।
टूटा ये हृद,अन्तस् रोता,क्यों ऐसे तीखे वार पिये।

क्या हार यहाँ,क्या जीत यहाँ, जीवन है कोई खेल नहीं।
है जीत अगर, चाहत तेरी,हर हार मुझे स्वीकार पिये।

जीवन भर की ,क्या बात करूँ, मैं इक लम्हे पे कहता हूँ।
बीते इक पल ,गर तुम बिन तो, है ऐसा पल इनकार पिये।

है रंग सभी, फीके-फीके, तुम बिन है,रात अमावस की।
है सुर रूठे,उलझी तानें,हैं सूनी हर झंकार पिये।

काला ये दिन, काली रैना, काली स्याही मेरी किस्मत।
मेरी इन चन्द लकीरों में,है कालिख का अम्बार पिये।

इस मधुर मिलन की बेला में, जब कण-कण जग का पुलकित है।
तुम रूठे हो, यूँ लगता है, रूठा सारा संसार पिये।
-‘अरुण’

8 Comments

  1. Abhishek Rajhans 29/11/2017
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 29/11/2017
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 29/11/2017
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 29/11/2017
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 29/11/2017
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 29/11/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 01/12/2017
  5. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 02/12/2017

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