मज़ा फिर भी है पीने मे…IBN

बाकी न रही अब चाह कोई “इंदर” के सीने मे,
कुछ इस क़दर टूटा है दिल ज़िंदगी को जीने मे…

हर ज़ाम पे जलता है दिल हर रोज शाम को,
पर सच कहूँ तुम्हे यारों मज़ा फिर भी है पीने मे…

………….अल्फ़ाज़ मेरे दिल के

4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 28/11/2017
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 28/11/2017
  3. Arun Kant Shukla अरुण कान्त शुक्ला 28/11/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 01/12/2017

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